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महिलाएं बच्चों की परवरिश के साथ साथ सेहत का रखें खास ख्याल कुछ इस प्रकार

महिलाएं बच्चों की परवरिश के साथ साथ सेहत का रखें खास ख्याल कुछ इस प्रकार

 

याद रखिए छोटी-छोटी बातों में दिए गए आपके ही संस्कार या आपके द्वारा सिखाई गई हर सीख ही आपके बच्चों के काम आती है । इसीलिए अपने बच्चों से जुड़े रहने के साथ-साथ कोशिश कीजिए कि आप खुद के और बच्चों के साथ अच्छा व्यवहार करें उन्हें अच्छी बातें सिखाएं । परंतु इसके विपरित ही देखा गया है कि बच्चों के साथ महिलाएं चिल्लाकर व्यवहार करती है उनको बताने या समझने की जगह कई बार प्रश्नात्मक सवाल करती है और उनको अपनी गलती का तब एहसास होता है जब बच्चे जवाब देना सीख जाते हैं फिर वह अपने आप को दोष देने लगती हमें घर गृहस्ती के काम से फुर्सत नहीं हमको कोई तजुर्बा नही , कि अपनी बच्चों पर ध्यान दे पाए ,शायद इसीलिए बच्चे बिगड़ गए हैं ।

दूसरी तरह कई महिलाएं अधिकांश अपना सारा दिन अपने बच्चों के साथ बिताना चाहती हैं। पर जॉब मैं होने के कारण , कई बार महिलाएं भी सारा दिन बच्चों के साथ नहीं रह पाती । सारा दिन शेड्यूल व्यस्तता के कारण खुद पर और बच्चों की सेहत पर ध्यान न देना भी आम होता जा रहा है। व्यस्तता के कारण हम अपने बच्चों को आजकल निजी मोबाइल फ़ोन भी दिला रहे हैं ,नतीजा बच्चे छोटी उम्र में मोबाइल के आदि हो रहे हैं या किसी और संगत में कई बार किशोर अवस्था में वे अपने मार्ग से भटक जाते है । कई बार तो यहां तक देखा गया है कि मां बाप के डर के कारण किसी किशोर ने अपनी जान तल ले ली और छोटे बच्चे तो अपनी गलतियां छुपाने के कारण झूठ भी बोलना शुरू कर देते हैं आखिर यह सब इसीलिए ही तो है क्योंकि आप बच्चों को सुख सुविधाएं तो प्रदान कर रहे हैं परंतु उनके लिए समय नहीं निकला पा रहे । नतीजा बच्चे कई बार हद से ज्यादा जिद्दी और व्यवहार में अनुकूल नहीं पाई जाती इसके कारण उन्हें युवावस्था में भी कई सारी परेशानियों को देखना पड़ता है। आइए जानते हैं कि हम अपने बच्चों को कैसे एक अच्छी परवरिश के साथ सेहत भी दे सकते हैं।

 

1. ऑफिस में जो भी तनाव है वह आप व्यक्तिगत रूप से महसूस करते हैं तो तनाव में अपने बच्चों से भी वैसा ही व्यवहार करते हैं एक लंबी सांस लेने के बाद सोचिए क्या यह उचित है इसमें आखिर बच्चों की क्या गलती ऑफिस की बात को ऑफिस तक सीमित रखें । घर के माहौल को खराब न होने दे ।

2 यदि आप फुल टाइम जॉब करती हैं और बच्चों की देखरेख यदि कोई आया ( नैनी) करती है तो आप जरूरी नहीं है कि आया से हालचाल पूछे , कि आपके बच्चे ने सारा दिन क्या किया ।जैसे अन्य काम जरूरी है वैसे ही आपके ऑफिस के बाद अपने बच्चे से अनिवार्य रूप से रोज बात करें और उससे सारे दिन का आप समाचार ले। ताकि वे स्वयं आपको सारा दिन अपने द्वारा किए गई गतिविधियों को बताने में उत्सुकता दिखाएं।

3 बच्चों के साथ दोस्ताना माहौल जितना जरूरी है उतना ही जरूरी है अनुशासन उन्हें अनुशासन में रहना। समय पर उठना और समय की कीमत समझाएं । अपने काम को खुद से करने की नई नई तरीके बताएं ताकि वह कार्य करना आसान लगे । बच्चों पर कोई भी चीज फूटने का प्रयास ना करें उनकी उम्र के और समझ के अनुसार ही उनको कार्य दें ताकि उनमें भी अपने कार्यों के प्रति उत्साह बना रहे । आखिर समय और संयम का ध्यान रखते हुए बच्चों को पालना ही समझदारी है और यही हमें सीखना चाहिए।

4. वर्तमान दौर में खाने-पीने के कई पैकेजिंग फूड व ऐसी व्यवस्थाए ” जंक फूड ” के रूप में मौजूद है जिनके लिए बच्चे हमेशा हमसे जिद करते हैं और हम महिलाएं अपने बच्चों पर पैसे खर्च करने से बिल्कुल नहीं कतराती। परंतु यह गलत है मार्केट में उपलब्ध पैकेजिंग फूड उतना ही उपयोग करना चाहिए । अत्याधिक इन्हीं चीजों पर आश्रित रहने से हम बीमार भी पड़ सकते हैं और सेहत के साथ खिलवाड़ करना अच्छी बात नहीं। कोशिश करना चाहिए कि घर का बना हुआ नाश्ता ही हम बच्चों को दें । यदि खुद नहीं बना सकते तो किसी को पैसे देकर बच्चों के लिए साधारण नमकीन, मठरी , पपड़ी बनवाकर ऐसी चीजें हमेशा घर में उपलब्ध रखना चाहिए ताकि उन्हें बार-बार बाजार का मुंह ना देखना पड़े । घर का बना नाश्ता सेहत के लिए भी काफी लाभदायक सिद्ध होगा। इसी प्रकार हमें अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए बाजार के पैकेजिंग फूड से दूरी बनाना चाहिए सुबह स्नैक्स या बाजार के बिस्किट , मैगी टिफिन में रखने की जगह हम बच्चों को सेहतमंद पराठे और सब्जियां भी पैक करके दे सकते हैं ताकि सब्जियों के प्रति भी उनका लगाव बना रहेगा और सेहत भी स्वस्थ रहेगी।

 

इसी प्रकार हम कई छोटी-छोटी व्यवस्थाओं को सीख कर और अपना शेड्यूल बना कर अपने जीवन में अपने बच्चों की सेहत स्वास्थ्य के साथ साथ परवरिश का ध्यान रख सकते हैं ।

 

©® आशी प्रतिभा दुबे (स्वतंत्र लेखिका)

(साहित्यकार , संपादक , शिक्षाविद् )

ग्वालियर , मध्य प्रदेश

भारत

 

यह लेखक के निजी विचार है।

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