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आजाद देश के गुलाम कैसे बनाए जाते हैं गरीब अमीरों को कभी उसके गुलाम

आजाद देश के गुलाम कैसे बनाए जाते हैं गरीब अमीरों को कभी उसके गुलाम बनते देखा है  नहीं यह सब अधिकारियों की अपनी एक ट्रिक होती है देखेंगे गरीबी और अमीरी का कैसा रिश्ता होता है एक गरीब महिला जो नगर निगम डीपो के बराबर में शौचालय है उसकी देखरेख के लिए उसको ड्यूटी दी गई है पर उसके परिवार का जो बसर किया जाता है थोड़ा सा ऊपर का कुछ काम करके किया जाता है जो वह महिला थोड़ा बिस्किट कचरी लेकर बैठी है पहले तो उससे कोई लेता नहीं वह एक थप्पा लगा हुआ है बाल्मीकि और अगर उससे कोई भूला बिसरा भी ले लेता है वह भी नगर निगम अधिकारियों की आंखों में चुप रहा है आप देख सकते हैं बराबर में कॉन्प्लेक्स ने कितनी जगह घेरखी है उसको तोड़ने के आदेश नहीं होंगे पर उसके दो बाई  तीन की मेज को वहां से हटाने के लिए सैनिटरी इंस्पेक्टर रवि शेखर जी ने फोटो खींची लेकिन कॉन्प्लेक्स के रैंप की कोई फोटो नहीं खींची या तो अधिकारी यह बताएं की कॉन्प्लेक्स वाले पैसा देते हैं महीने का या गरीब से पैसा लेना चाहते हैं वह भी नगर निगम की आंखों में खटक गई है लेकिन यह गरीब है तो स्कीम एक गरीब के लिए होती है अमीर के लिए कोई नहीं होती जब कि कहै कहां जाता है दंड के लिए गरीब और अमीर का कोई मतलब नहीं होता पर यहां तो मतलब बना दिया गया है गरीब को उखाड़ कर फेंकना चाहते हैं आमिर को लगाकर देना चाहते हैं क्या गरीब मानवता के आधार कानूनों का इस्तेमाल नहीं करेगा उसे हमेशा वांछित रखना है  जिस पर लेकर बैठी है और आगे एक कॉन्प्लेक्स है जो आप देखेंगे इस महिला का तो सिर्फ एक मेज है लेकिन वह कॉन्प्लेक्स ने तो पूरे नालापट रखा है और ग्रिल रेलिंग लगा रखी अपनी आप देख सकते हैं के अमीरी और गरीबी का क्या रिश्ता होता है गरीब की जिंदगी कुछ नहीं है अमीर के आगे बोलते नहीं है ऐसा नगर निगम के अधिकारी बोलते हैं या तो अधिकारी को लेकर वह कंपलेक्स वाले पैसे देता है या गरीब से पैसा लेना चाहते हैं जो अतिक्रमण गरीब के लिए वह अमीर के लिए क्यों नहीं होता ऐसा नगर निगम के अधिकारियों ने दिखाया है अब आप देख सकते हैं मैं अमरीश कुमार सैलानी न्यूज़ इंडिया 19 मेरठ ब्यूरो चीफ न्यूज़ आज तक आपके घर तक आपके शहर तक न्यूज इंडिया19आजाद देश के गुलाम कैसे बनाए जाते हैं गरीब अमीरों को कभी उसके गुलाम बनते देखा है नहीं यह सब अधिकारियों की अपनी एक ट्रिक होती है देखेंगे गरीबी और अमीरी का कैसा रिश्ता होता है एक गरीब महिला जो नगर निगम डीपो के बराबर में शौचालय है उसकी देखरेख के लिए उसको ड्यूटी दी गई है पर उसके परिवार का जो बसर किया जाता है थोड़ा सा ऊपर का कुछ काम करके किया जाता है जो वह महिला थोड़ा बिस्किट कचरी लेकर बैठी है पहले तो उससे कोई लेता नहीं वह एक थप्पा लगा हुआ है बाल्मीकि और अगर उससे कोई भूला बिसरा भी ले लेता है वह भी नगर निगम अधिकारियों की आंखों में चुप रहा है आप देख सकते हैं बराबर में कॉन्प्लेक्स ने कितनी जगह घेरखी है उसको तोड़ने के आदेश नहीं होंगे पर उसके दो बाई तीन की मेज को वहां से हटाने के लिए सैनिटरी इंस्पेक्टर रवि शेखर जी ने फोटो खींची लेकिन कॉन्प्लेक्स के रैंप की कोई फोटो नहीं खींची या तो अधिकारी यह बताएं की कॉन्प्लेक्स वाले पैसा देते हैं महीने का या गरीब से पैसा लेना चाहते हैं वह भी नगर निगम की आंखों में खटक गई है लेकिन यह गरीब है तो स्कीम एक गरीब के लिए होती है अमीर के लिए कोई नहीं होती जब कि कहै कहां जाता है दंड के लिए गरीब और अमीर का कोई मतलब नहीं होता पर यहां तो मतलब बना दिया गया है गरीब को उखाड़ कर फेंकना चाहते हैं आमिर को लगाकर देना चाहते हैं क्या गरीब मानवता के आधार कानूनों का इस्तेमाल नहीं करेगा उसे हमेशा वांछित रखना है जिस पर लेकर बैठी है और आगे एक कॉन्प्लेक्स है जो आप देखेंगे इस महिला का तो सिर्फ एक मेज है लेकिन वह कॉन्प्लेक्स ने तो पूरे नालापट रखा है और ग्रिल रेलिंग लगा रखी अपनी आप देख सकते हैं के अमीरी और गरीबी का क्या रिश्ता होता है गरीब की जिंदगी कुछ नहीं है अमीर के आगे बोलते नहीं है ऐसा नगर निगम के अधिकारी बोलते हैं या तो अधिकारी को लेकर वह कंपलेक्स वाले पैसे देता है या गरीब से पैसा लेना चाहते हैं जो अतिक्रमण गरीब के लिए वह अमीर के लिए क्यों नहीं होता ऐसा नगर निगम के अधिकारियों ने दिखाया है अब आप देख सकते हैं मैं अमरीश कुमार सैलानी न्यूज़ इंडिया 19 मेरठ ब्यूरो चीफ न्यूज़ आज तक आपके घर तक आपके शहर तक न्यूज इंडिया19

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