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दुखद : नहीं रहे हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, IGMC में ली आखिरी सांस रिपोर्टर दिलीप कुमार मिश्रा

दुखद : नहीं रहे हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, IGMC में ली आखिरी सांस
शिमला महेंद्र वर्मा
शिमला, 08 जुलाई : हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता वीरभद्र सिंह अब इस दुनिया में नहीं रहे। उनका गुरुवार तड़के निधन हो गया। 87 वर्ष की उम्र में वीरभद्र सिंह ने दुनिया को अलविदा किया। वीरभद्र सिंह ने आईजीएमसी अस्पताल शिमला में आखिरी सांस ली। पिछले सवा दो महीने से वह आईजीएमसी में उपचाराधीन थे। दूसरी बार कोरोना से जंग जीतने के बावजूद उनकी हालत नाजुक बनी हुई थी। तीन दिन से वह वेंटिलेटर पर थे।
आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर जनक राज ने बताया कि बहुत दुखी मन से सूचित किया जा रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री श्री वीरभद्र सिंह जी आज सुबह 3:40 बजे लंबी बीमारी के बाद स्वर्गसिधार गये।एक ओर जहां अनुराग ठाकुर के कैबिनेट मंत्री बनने पर जश्न मनाया जा रहा था तो वहीं इस घटना से पूरे प्रदेश में मातम सा छा गया है।
वीरभद्र सिंह के निधन से प्रदेश शोक में डूब गया है। वह छह बार हिमाचल के मुख्यमंत्री रहे। वीरभद्र सिंह अर्की से कांग्रेस के विधायक भी थे। कांग्रेस ने वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव वीरभद्र सिंह के ही नेतृत्व में लडे थे। वहीं पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने 2022 के चुनाव भी उन्हीं के नेतृत्व में लड़ने की घोषणा की थी। वीरभद्र सिंह करिश्माई व्यक्तित्व वाले राजनेता थे।
राजघराने से ताल्लुक रखने वाले वीरभद्र सिंह का जन्म रामपुर बुशहर में 23 जून 1934 को राजा पदम सिंह व शांति देवी के घर में हुआ। उनकी प्रांरभिक शिक्षा शिमला के बिशप काटन स्कूल व देहरादून में पूरी हुई। उन्होंने दिल्ली स्थित सेंट स्टीफन कॉलेज में स्नातक ऑनर्स व दिल्ली विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री प्राप्त की। राज परिवार से संबंध होने के कारण उनमें समाज सेवा जज्बा बचपन से ही था इसलिए उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने राजनीति को ही चुना। वीरभद्र सिंह का एक बेटा और चार बेटियां हैं। उनके बेटे विक्रमादित्य सिंह वर्तमान में शिमला ग्रामीण से कांग्रेस विधायक हैं। नवंबर 1985 में वीरभद्र सिंह ने प्रतिभा सिंह से शादी की।

वीरभद्र सिंह का सियासी सफर

वीरभद्र सिंह 1962 में पहली बार महासू सीट से सांसद निर्वाचित हुए। वह 1967 में लोकसभा में वे दूसरी बार निर्वाचित हुए। 1971 में तीसरी बार लोकसभा चुनाव में विजयी रहे। 1976-77 के दौरान वह पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सहायक मंत्री रहे। 1980 के लोकसभा चुनावों में उन्हें चौथी बार चुना गया। 1982-83 में वे राज्य उद्योग मंत्री रहे। वीरभद्र सिंह 1983, 1990, 1993, 1998, 2003 और 2017 तक वे छह बार हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।

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