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मुख्य चिकित्सा अधीक्षक की भूमिका और दास्तान-ए-कोरोना काल

*मुख्य चिकित्सा अधीक्षक की भूमिका और दास्तान-ए-कोरोना काल*

 

सुलतानपुर, कोरोना काल का वो वख्त जब गांव, शहर, देहात, में मौंतो का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा था। उस वख्त धरती के भगवान(डाक्टर)भी संकटकाल से गुज़र रहे थे। वख्त शैनेःशैनेः आगे बढ़ रहा है। कोरोना काल की त्रासदी से देश उबरने की कसरत पूरी शिद्दत से कर रहा है। लेकिन इस बीच किसने किसको खोया और किसने किसको बचाया इसपर जानना भी जरूरी है। आइये आपका उस नाम से परिचय करा दूं जिसने हमारे अपनो को बचाने में खुद के अपने कई परिजनों को खो दिया। लेकिन अपनी जिम्मेदारी और कर्तव्यों के निर्वाहन के लिए एक दिन भी जिला छोड़ना मुनासिब नहीं समझा। हम बात कर रहे हैं जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्साधिक्षक डाॅ. एससी कौशल की जिन्होंने बतौर सीएमएस २६.११.२०२० को चार्ज लिया, और चार्ज लेते ही वैश्विक महामारी कोविड 19: ने देश के साथ ही जनपद को भी अपनी गिरफ्त में ले लिया था। ऐसे में महामारी से निपटने के लिए न तो तैयारी ही थी और ना ही कोई बेहतर रणनीति बनी थी। और सूत्रों की माने तो कोविड महामारी से निपटने के लिए आवश्यक संसाधन भी नाकाफी थे। इसी दरम्यान कोरोना संक्रमण का दायरा इस तरह बढ़ने लगा की हालात दिन-प्रतिदिन बदतर होते रहे, बावजूद इसके प्रशासन व जनप्रतिनिधियों ने मोर्चा संभाला जरूर लेकिन मुश्किलें कम होने के सिवाय नियंत्रण विहीन हो चली, ऐसे में जिसके सहारे कोरोना से निपटना था, उन्हें भी कोरोना वायरस ने संक्रमित कर होम आइसोलेशन में पहुंचा दिया। अब सवाल था कि डाक्टर, फार्मासिस्ट, वार्डब्वाय एक के बाद एक कोरोना के चपेट में आ रहे हैं तो अस्पताल में आने वाले कोविड मरीजों का उपचार कैसे होगा। इसी बीच मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डाँ एससी कौशल के परिजनों में भी कोरोना महामारी के चलते बहन का निधन हो गया, फिर उनकी पत्नी की बहन भी कोरोना के चलते नही रही, सीएमएस के मौसा जी भी कोरोना काल के गाल में समा गए, बहन का १० वर्षीय पौत्र भी कोरोना की भेट चढ़ गया, भाई भी वेंटीलेटर सपोर्ट पर रहा, परंतु एक दिन भी अस्पताल से छुट्टी लेकर परिजनों के अंतिम संस्कार से लेकर किसी भी क्रियाक्रम में शामिल नही हो सके, इस दौरान जिला प्रशासन के सहयोग से अस्पताल में कोरोना संक्रमित संदिग्ध आइसोलेशन वार्ड बनाया गया जिसमें ७५ बेड का इंतजाम किया गया, आंक्सीजन से लेकर तमाम आवश्यक सुविधाओं के साथ शुरूआत की गई। लेकिन समस्या डाक्टर, फार्मासिस्ट और वार्डब्वाय की कमी के कारण कुछ शिकायतों का भी दौर चला, समस्या को समय रहते समाप्त करने के लिए सीएमएस ने खुद कमान संभालते हुए संदिग्ध आइसोलेशन वार्ड में मरीजों से मिलना समस्याओं का समाधान करना तथा बेहतर इलाज की व्यवस्था देना जिससे मरीज अतिशीघ्र पूर्णरूप से स्वस्थ होकर जा सके। और आने वाले अन्य मरीजों के लिए वार्ड में उपचार की व्यवस्था बनाई जा सके। इन्ही तमाम सवालों को लेकर जब सीएमएस डाॅ. एससी कौशल के पास पहुंचे तो पहले तो सीएमएस ने सिर्फ अस्पताल में दी जाने वाली सुविधाओं पर ही चर्चा किया, परंतु बहुत कुरेदने के बाद उन्होने कहाकि कोविड 19: के चलते परिजनों की मौतें बहुत पीड़ादायक रही, ये दर्द हमेशा बना रहेगा। मैं उनके अंतिम दर्शन भी नहीं कर सका, उसकी वजह सिर्फ मेरी जिम्मेदारी और अपने पेशे के प्रति निभाए जाने वाले कर्तव्य का धर्म जो मुझे रोकता रहा। डाॅ. कौशल ने बताया की जिस समय कोरोना वायरस पूरे वेग पर था, उस समय मुझे लगा कि मेरी जरूरत सबसे ज्यादा यहां है। और मैने वही किया जिसकी जरूरत थी।बहरहाल कोरोना वायरस चक्र को रोकने की मुहिम को भारत सरकार व राज्य सरकार की रणनीति ने जबरदस्त असर दिखाया और वैश्विक महामारी के प्रतिशत को कम करने के साथ ही विराम भी लगा दिया। परंतु पूर्व केंद्रीय मंत्री व जिले की सांसद मेनका संजय गांधी व स्थानीय प्रशासन खासकर जिलाधिकारी रवीश कुमार गुप्ता, मुख्य विकास अधिकारी अतुल वत्स के द्वारा रात-दिन की कोशिश,बैठक और रणनीति का दौर एल-1-से एल-2 हास्पिटल में बेहतरीन उपचार की व्यवस्था देना मरीजों के लिए जि़दगी की उम्मीद साबित हुई। अन्यथा कोरोना की दहशत ने ही जिले के लोगों के चेहरे को स्याह कर दिया था। लेकिन इस त्रासदी में जिस पीड़ा को झेलते हुए मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डाँ.एससी कौशल ने अपने फर्ज को अंजाम तक पहुंचाने में रात-दिन एक करके मौत और जिंदगी के बीच झूलते हुए मरीजों के लिए सेवाएं दी है उसे भुलाया नहीं जा सकता। ऐसे जिम्मेदार अधिकारी के लिए जनपद सदैव ऋणी रहेगा।

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