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पूंजीपतियों के लिए ई रिक्शा बना कमाई का जरिया तो वहीअवैध ई-रिक्शा बने शहर के लिए मुसीबत, लग रहा जाम रिपोर्टर दिलीप कुमार मिश्रा

*पूंजीपतियों के लिए ई रिक्शा बना कमाई का जरिया तो वहीअवैध ई-रिक्शा बने शहर के लिए मुसीबत, लग रहा जाम*

 

सुल्तानपुर,, शहर में ई-रिक्शों की कुछ इस तरह कतारें नजर आती हैं।नगर में बढ़ती ई-रिक्शों की संख्या अव्यवस्था फैला रही है। अवैध रूप से संचालित हो रहे अवैध ई-रिक्शों की संख्या दिनों दिन बढ़ रही है।
यदि ऐसे ही हालात रहे तो शहर ई-रिक्शों से भर जाएगा। जहां पैदल निकलना भी मुश्किल होगा। नगर वासियों में प्रशासन की इस उदासीनता से रोष है। इन ई-रिक्शों के संचालन के लिए मानक तय होने चाहिए। जिससे शहर की व्यवस्था बनी रहे।

सोमवार को शहर में जगह-जगह जाम के हालात नजर आते है। मुख्य चौराहों पर भी यही हालात रहते है। शहर के हर चौराहे पर दोपहर के समय कई बार जाम के हालात बने और सुधरे। इस जाम के जिम्मेदार वह ई-रिक्शा थे जो चौराहे पर चारों दिशाओं को जाने के लिए खड़े होते है।जबकि चौराहे पर यातायात पुलिस तैनात भी रहती है। बार बार जाम के हालत होने के बाद भी यातायात पुलिस तमीशबीन बनी रहती है।

जबकि नगर वासियों और राहगीरों को इन ई रिक्शों से परेशानी का सामना करना पड़ता है। सबसे ज्यादा परेशानी जब स्कूल 1 तारीख को खुल जाएंगे तो घर लौटने वाले बच्चों को होगी।
जगह-जगह स्कूल वाहन जाम में फिर से फंसे दिखाई देगे।
वही टेंम्पू व मैजिक संचालकों का कहना है की ई रिक्शा शहर से लेकर कस्बों की बाजारों तक जैसे लंभुआ बाजार,कूरेभार,पारा बाजार, अलीगंज बाजार,धमौर बाजार तक धड़ल्ले से फर्राटा भरते हैं। इनकी वजह से ना तो हम लोग नगर पालिका का शुल्क अदा कर पाते हैं ना तो घरो का खर्च निकाल पाते है । टैंपू व मैजिक संचालकों का कहना है कि जैसे हम लोगों का मानक तय है वैसे इन ई-रिक्शों का मानक तय होना चाहिए। संबंधित क्षेत्र के लिए नगर पालिका को भी अपनी परमिशन देनी चाहिए। लेकिन सहायक संभागीय विभाग की मेहरबानी इस कदर है कि अवैध ई-रिक्शों के संचालन पर कोई कार्रवाई नहीं हैं। जबकि नगर में प्रतिदिन एक दर्जन ई-रिक्शों की खरीदारी हो रही है।एक एक पूंजीपतियों के पास कम से कम दस दस ई-रिक्शा है। यदि यही हाल रहा तो नगर ई-रिक्शों से भर जाएगा।

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