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एंकर पृथक बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर 635 दिन तक अनशन कर चुके बुंदेली समाज के संयोजक द्वारा पाटकर अपने साथियों के साथ विश्व पर्यावरण दिवस पर 17वीं बार प्रधानमंत्री के अलावा पर्यावरण मंत्री व मध्य प्रदेश के सीएम को अपने खून से खत लिखकर पड़ोसी जिले छतरपुर के बक्सवाहा जंगल को बचाने की मांग की रिपोर्टर दिलीप कुमार मिश्रा

एंकर-पृथक बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर 635 दिन तक अनशन कर चुके बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर अपने साथियों के साथ विश्व पर्यावरण दिवस पर 17वीं बार प्रधानमंत्री के अलावा पर्यावरण मंत्री व मप्र के सीएम को अपने खून से खत लिखकर पड़ोसी जिले छतरपुर के बक्सवाहा जंगल को बचाने की मांग की।

V/O- आज विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर सहित उनके लगभग दो दर्जन साथियो ने बक्सवाहा के जंगल को बचाने के लिए खून से खत लिखा है। आपको बता दे कि पड़ोसी जिले छतरपुर में स्थित बक्सवाहा का जंगल है जहाँ हीरे की खदान के लिए पेड़ो को काटने की अनुमति दे दी गयी है। लगभग 382 हेक्टेयर की जमीन में सवा दो लाख पेड़ काटे जाने है। जिसकी अनुमति मध्यप्रदेश राज्य सरकार दे चुकी है। अब मामला केंद्र में अटका हुआ है। अगर केंद्र सरकार अनुमति देती है तो ये पेड़ काट दिए जाएंगे।

बाइट- तारा पाटकर (संयोजक बुंदेली समाज)- ने बताया कि आज विश्व पर्यावरण दिवस है पर्यावरण को बचाने के लिए तरह तरह की मुहिम चल रही है हमलोग आज बक्सवाहा के जंगलों को बचाने के लिए प्रधानमंत्री मंत्री,केंद्रीय पर्यावरण मंत्री और मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश को खून से खत लिख रहे है और उनसे कह रहे है कि हीरा नही हरयाली चाहिए बुंदेलखंड की खुशहाली चाहिए क्योंकि उन्होंने हीरे की खदान को खुदवाने के लिए हमारे पड़ोसी जिले छतरपुर में जो बक्सवाहा का जंगल है उसको काटने की अनुमति शिवराज सरकार ने दे दी है अब मामला केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय में मामला विचारधीन है अगर वहाँ से अनुमति मिल जाती है तो सवा दो लाख पेड़ काटे जाएंगे और वो 382 हेक्टेयर में है। हम चाहते है ये रोका जाए। जो पेड़ लगे है वह हमारा ऑक्सीजन प्लांट है और वही असली हीरा है। जैसा कि हमारे पुराणों में लिखा है कि एक वृक्ष 10 पुत्रो के समान होता है वहाँ सवा दो लाख पेड़ काटने का मतलब है कि करीब 25 लाख लोगो की सामुहिक हत्या की तैयारी की जा रही है। उसे रोके जाने के लिए हम लोग खून से खत लिख रहे है। महोबा के अलावा छतरपुर के लोग भी आज बक्सवाहा के जंगल में खून से खत लिखने गए है। इसके अलाबा हमीरपुर, बाँदा, चित्रकूट,टीकमगढ़, निवाड़ी सब जगह से खून से खत लिखकर केंद्र सरकार राज्यसरकार को भेजे जा रहे है ताकि इसको रोका जा सके।

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