Mon. Jun 14th, 2021

News India19

Latest Online Breaking News

लख़नऊ गंगा-जमुनी तहज़ीब की ज़िन्दा मिसाल हरीश चन्द्र धानुक का आज निधन हो गया. मोहर्रम के दिनों में हरीश चन्द्र धानुक पुराने लख़नऊ की सड़कों पर मातम करते हुए नज़र आते थे।

*हरीश चन्द्र धानुक : मोहर्रम में देखना तुम्हें* 

                    *ढूंढेगा लख़नऊ*

*—————————————-*

*लख़नऊ/* गंगा-जमुनी तहज़ीब की ज़िन्दा मिसाल हरीश चन्द्र धानुक का आज निधन हो गया. मोहर्रम के दिनों में हरीश चन्द्र धानुक पुराने लख़नऊ की सड़कों पर मातम करते हुए नज़र आते थे.

 

*बशीरतगंज इलाके में रहने वाले हरीश चन्द्र धानुक के घर से निकलने वाला ताज़िया पूरे देश में मशहूर है.* इसे किशनू ख़लीफ़ा के ताज़िये के नाम से जाना जाता है. *हरीश चन्द्र धानुक के घर से यह ताज़िया 1880* में निकलना शुरू हुआ था जिसे पीढ़ी दर पीढ़ी निकालने का सिलसिला चलता आ रहा है.

 

*हरीश चन्द्र धानुक ने ताज़ियेदार सेवक संघ बनाया था.* इस *संघ में हिन्दू ताज़ियेदारों को जोड़ा था.* वह खुद इस संगठन के अध्यक्ष थे. *हरीश चन्द्र धानुक* रेलवे में जूनियर इंजीनियर थे, लेकिन यह बात बहुत कम लोग जानते थे.

 

बहुत साधारण वेशभूषा में वह मोहर्रम की मजलिसें करने आते थे और सबसे आगे बैठते थे. ज़्यादातर धर्मगुरु भी उन्हें पहचानते थे. मोहर्रम के दौरान सफाई और स्ट्रीट लाईट की समस्याओं पर उनका बड़ा ध्यान रहता था. जहाँ समस्या नज़र आती वह खुद जाकर सम्बंधित विभाग में शिकायत दर्ज करा आते थे.

 

उनके निधन से गंगा-जमुनी तहज़ीब का पिलर ढह गया है. पुराने शहर में जिसने भी सुना वह दुखी नज़र आया.

विज्ञापन 3

LIVE FM

You may have missed